छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण-ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

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प््राचीनकाल में छत्तीसगढ़ दक्षिण कोसल कहलाता था, संभवतः इस क्षेत्र में उत्तम गुणवत्ता के कोसा की प्रचुरता के कारण इसे कोसल संज्ञा प्राप्त हुई, कोसा आज भी छत्तीसगढ़ की पहचान है। ऐतिहासिक काल में यह क्षेत्र सर्वप्रथम मौर्य, फिर सातवाहन ,गुप्त वाकाटक साम्राज्यों का अंग रहा, इसके बाद यहाॅं नलवंश की (दक्षिणी हिस्से में) और अंततः सोमवंशियों की स्वतंत्र सत्ता कायम हुई, सिरपुर के सोमवंंिशयों के पतन के बाद कल्चुरी यहाॅं के अधिपति बने, 16 वीं शताब्दी तक कल्चुरियों की सत्ता क्षीण होने पर मंडला के गोंडवाना राज्य का कुछ समय तक यहाॅं कुछ हिस्से में (रतनपुर को छोड़कर शेष भाग में) अधिपत्य रहा, अंततः नागपुर के भोंसला राज्य ने छत्तीसगढ़ को 1741 ई. में मराठा राज्य का अंग बना लिया, इस अवधि तक हमें इस क्षेत्र का नाम दक्षिण कोसल अथवा रतनपुर राज्य (मुगलकाल में,अबुल फजल ने रतनपुर राज्य सम्बोधित किया है) मिलता है।

साहित्य में छत्तीसगढ़ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग 15 वीं सदी में खैदागढ़ राज्य के राजा लक्ष्मीनिधि राय के चारण कवि दलराम राव द्वारा 1497 ई में किया जाना प्राप्त होता है। कवि गोपाल मिश्र ने अपने कृति खूब तमाषा में रतनपुर राज्य के लिए सर्वप्रथम छत्तीसगढ़ शब्द का प्रयोग था इसके बाद तवारीख ए हैहावंषीय राजाओं की एवं रतनपुर का इतिहास लिखने वाले बाबू रेवाराम ने 1896 ई. में विक्रमविलास नामक अपने ग्रंथ में इस राज्य को छत्तीसगढ़ की संज्ञा दी है।
वस्तुतः मराठों के आगमन के पश्चात् छत्तीसगढ़ एक पृथक राजनीतिक इकाई के रूप् में देखा जाने लगा था।बिंबाजी के समय बस्तर में कहान् हल्बा क्रांति 1773-79 ई. हुई जिससे निपटने राजा को मराठा सैन्य सहायता हेतु विवश होना पड़ा। जिसने राजा दरियादेव (1777-1800) को मराठों का राजनिष्ठ बना दिया, सैन्य सहयोग के प्रभाव में हुई 6 अप्रेल 1878 ई की संधि जिसमें 590000 रूप्ये की वार्षिक टकोली सम्मिलित थी, ने बस्तर राज्य को मराठों की अधीनता में ला दिया अब नागपुर राज्य की दृष्टि में बस्तर भी छत्तीसगढ़ सूबे का अंग था और यहां से अन्य जमींदारियों की भाॅंति उन्हें निश्चित टकोली प्राप्त होती थी।1854-55 ई. में छत्तीसगढ़ ब्रिटिश साम्राज्य का अंग बन गया जब 1861 ई. में मध्यप्रांत का गठन हुआ तब छत्तीसगढ़ इसके पाॅंच संभागों में से एक था 1905 में इसके एक जिले संबलपुर उड़िया भाषी क्षेत्र को तत्कालीन बंगाल प्रांत के ओडिशा में तथा सांस्कृतिक समानता के कारण बंगाल के छोटा नागपुर के अंतर्गत आने वाली पाॅंच रियासतों जशपुर, सरगुजा, उदयपुर, चांगभखार व कोरिया को मध्य प्रांत के छत्तीसगढ़ संभाग में मिला दिया गया इस तरह वर्तमान छत्तीसगढ़ राज्य का मानचित्र 1905 में बन गया था इस समय सम्पूर्ण क्षेत्र में कुल 14 रियासतों थी।

सर्वप्रथम छत्तीसगढ़ राज्य की स्पष्ट कल्पना करने वाले व्यक्ति थे-विद्वान, साहित्यकार, हरिजन सेवक, स्वतंत्रता सेनानी पं. सुन्दरलाल शर्मा जिन्होने 1918 में अपनी पांडुलिपि में छत्तीसढ़ राज्य का स्पष्ट रेखाचित्र खींचा।

पं. शर्मा ने छत्तीसगढ़ की विशिष्ट एवं सर्वथा भिन्न सामाजिक सांस्कृतिक आर्थिक एवं भौगोलिक सत्ता को परिभाषित करते हुए इसके पृथक राजनैतिक सत्ता की वकालत अप्रत्यक्ष रूप् में आज से आठ दशक पूर्व ही कर दी थी।इन्हें गांधीजी ने अपना गुरू (अछुतोद्धार के क्षेत्र में) स्वीकार किया था। असहयोग आन्दोलन के ठीक पूर्व पं.शर्मा के कंडेल सत्याग्रह की सफलता ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्र के राजनैतिक नक्शे में अंकित किया।

छत्तीसगढ़ राज्य की माॅंग 1924 में रायपुर जिला परिषद ने एक संकल्प पारित कर मध्यप्रांत से पूथक छत्तीसगढ़ राज्य की माॅग की थी इसके बाद कांग्रेस के त्रिपुरी (जबलपुर) अधिवेशन 1939 में भी यह माॅंग रखी गई, स्वातंत्रयोत्तर काल में भाषायी आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के उद्देश्य से 1953 के अंत में सैयद फजल अली की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय राज्य पुर्नगठन आयोग गठित हुआ था। 1956 में छत्तीसगढ़ को मध्यप्रांत में ही रखकर बरार को तत्कालीन बृहद मुम्बई राज्य में मिला दिया गया अब छत्तीसगढ़ पुनगठित मध्यप्रांत अर्थात मध्यप्रदेश राज्य का हिस्सा बन गया ।

1 सितंबर 1998 को राज्य विधान सभा ने राष्ट्रपति द्वारा भेजे मध्यप्रदेश पुनर्गठन विधेयक 1998 में लगभग 40 संशोधनों के साथ वापस राष्ट्रपति को भेजा अब राज्य निर्माण केन्द्र सरकार का कार्य रह गया था अतः 25 जुलाई 2000 को केन्द्र सरकार द्वारा लोक सभा में छत्तीसगढ़ संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया गया जो 31 जुलाई 2000 को पारित हुआ। जो 9 अगस्त 2000 को राज्य सभा में भी एक संशोधन छत्तीसगढ़ में राज्य सभा की सीटों से सम्बन्धित के साथ पारित हो गया इस संशोधन को लोक सभा ने भी उसी दिन स्वीकार कर लिया 28 अगस्त 2000 को भारत के राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के पश्चात यह मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000 बन गया जो भारत के राजपत्र में अधिनियम संख्,या 28 के रूप् में अधिसूचित हुआ।इस प्रकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप् निर्धारित तिथि 1 नवम्बर 2000 को मध्यप्रदेश से पृथक होकर छत्तीसगढ़ भारत संघ का 26 वाॅं राज्य बना।

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