Constitution – भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 द्वारा हुए परिवर्तनChange introduced by the Indian Independence Act 1947

इसमें तीन परिवर्तन हुए –

1. संविधान सभा को पूर्णतः संप्रभु निकाय बनाया गया जो स्वेच्छा से कोई भी संविधान बना सकती थी।

2. संबिधान सभा एक विधायिका भी बन गई जिसके दो कार्य थे-पहला कार्य संबिधान निर्माण तथा दूसरा कार्य देश के लिए बिधि निर्माण।संबिधान सभा एक विधायिका भी बन गई। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो सभा को दो अलग अलग काम सौंपे गए।इनमें से एक था – स्वतंत्र भारत के लिए संविधान बनाना दूसरा देश के लिए आम कानून लागू करना । इस प्रकार संबिधान सभा स्वतंत्र भारत की पहली संसद बनी। जब भी सभा की बैठक संबिधान सभाा के रूप में होती इसकी अध्यक्षता डाॅक्टर राजेंद्र प्रसाद करते और जब बैठक बतौर विधायिका होती तब इसकी अध्यक्षता जी.वी. मावलंकर करते थे। संविधान सभा 26 नवंबर 1949 तक इन दोनों रूपों में कार्य करती रही। इस समय तक संबिधान निर्माण का कार्य पूरा हो चुका था।

3. मुस्लिम लीग के सदस्यों के विभाजन उपरांत अलग हो जाने से संविधान सभा की सदस्य संख्या 299 रह गयी।

मुस्लिम लीग के सदस्य भारतीय संबिधान सभा से अलग हो गए इसकी वजह से सन 1946 में माउंटवेटन योजना के तहत तय की गई सदस्यों की कुल संख्या 389 सीटों की बजाय 299 तक आ गिरी।भारतीय प्रांतों की संख्या 296 से 229 और देसी रियासतों की संख्या 93 से 70 कर दी गई 31 दिसंबर 1947 को राज्यवार सदस्यता को अध्याय के अंत में तालिका संख्या 2.4 में प्रस्तुत किया गया है।

-2 वर्ष 11 महीने और 18 दिनों में संबिधान सभा की कुल 11 बैठकें हुईं जिसमें संविधान निर्माताओं ने लगभग 60 देशों के संविधानों का अवलोकन किया और इसके प्रारूप पर 114 दिनों तक विचार हुआ।

-24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की अंतिम बैठक हुई इसके बाद सभा ने 26 जनवरी 1950 से 1951-52 में हुए आम चुनावों के बाद बनने वाली नई संसद के निर्माण तक भारत की अंतरिम संसद के रूप् में कार्य किया।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *