Constitution-संविधान सभा का गठन Making of the Constitution Assembly

1. क्रिप्स मिशन की असफलता के बाद 1946 में तीन सदस्यीय कैबिनेट मिशन को भारत भेजा गया। कैबिनेट मिशन के एक प्रस्ताव के द्वारा अंततः भारतीय संविधान के निर्माण के लिए एक बुनियादी ढाॅंचे का प्रारूप स्वीकार कर लिया गया, जिसे संविधान सभा का नाम दिया गया।

2. प्रत्येक प्रांत देशी रियासतों व राज्यों के समूह को उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें दी जानी थीं सामान्यतः 10 लाख की जनसंख्या पर 1 सीट की व्यवस्था रखी गई।

3. संविधान सभा की कुल 389 सीटों में से ब्रिटिश सरकार के प्रत्यक्ष शासन वाले प्रांतों को 296 सीटें तथा देशी रियासतों को 93सीटे आवंटित की जानी थी ।

4. 296 सीटों में 292 सदस्यों का चयन ब्रिटिश भारत के गवर्नरों के अधीन 11 प्रांतों तथा चार का चयन दिल्ली, अजमेर मारवाड़ कुर्ग एवं ब्रिटिश बलुचिस्तान के 4 चीफ कमिश्नर के प्रांतों से किया जाना था।

5. प्रत्येक विधानसभा में प्रत्येक समुदाय के सदस्यों द्वारा अपने प्रतिनिधियों का चुनाव एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से समानुपातिक प्रतिनिधित्व तरीके के मतदान से किया जाना था।

6. देशी रियासतों के प्रतिनिधियों का चुनाव रियासतों के प्रमुखों द्वारा किया जाना था।

अतः यह स्पष्ट था कि संबिधान सभा अंाशिक रूप् से चुनी हुई और आंशिक रूप से नामांकित निकाय थी। इसके अलावा सदस्यों का चयन अप्रत्यक्ष रूप से प्रांतीय व्यवस्थापिका के सदस्यों द्वारा किया जाना था जिनका चुनाव एक सीमित मताधिकार के आधार किया गया था।

संबिधान सभा के लिए चुनाव जुलाई अगस्त 1946 में हुआ इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 208, मुस्लिम लीग को 73 तथा छोटे समूह व स्वतंत्र सदस्यों को 15 सीटें मिलीं। हालांकि देशी रियासतों को आवंटित की गई 93 सीटें भर नहीं पाई क्योंकि उन्होने खुद को संविधान सभा से अलग रखने का निर्णय लिया।

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