शारीरिक विकास (PHYSICAL DEVELOPMENT)2. पिण्डावस्था (Period of Embryo)

2. पिण्डावस्था (Period of Embryo):- 

यह जन्म पूर्व विकास की द्वितीय अवस्था है। यह अवस्था तीसरे सप्ताह से आठवें सप्तहा तक चलती है। लगभग 6 सप्ताह चलने वाली पिण्डावस्था परिवर्तन की अवस्था है, जिसमें कोषों का समूल एक लघु मानव (Miniature Individual) के रूप में विकसित हेा जाता है।
शरीर की लगभग सभी विशेषताएॅं बाह्य एवं आन्तरिक इस अवधि में स्पष्ट हो जाती है।
विकास मस्तक-अधोमुखी (Cephalocaudal Sequence) दिशा में होता हैं।
तेजी से विभक्त होकर द्विगुणित हो रहे कोष समुच्चय के बाह्य सतह के कोष, सहायक उपकरणों के रूप में परिवर्तित हो जाते है जो जन्म लेने तक भ्रूण के पोषण में सहायक होते है।

(i) आॅंवल (अपरा) (Placenta):- 1इंच मोटी ता 8-10 इंच व्यास वाली गोल वृत्ताकार (Pie Shaped) संरचना होती है। यह गर्भाशय में उस जगह विकसित होती है जहाॅं निषेचित अण्ड अपने को आरोपित करता है।

(II) नाभिनाल (Umblical cord):- यह रक्त नलिकाओं से युक्त 10-20 इंच लम्बी तथा लगभग 1/2 इंच व्यास वाली संरचना होती है। यह नही एक ओर आॅंवल से तािा दूसरी ओर भ्रूण के उदर से जुड़ी होती है।
आॅंवल एवं नाभिनाल द्वारा माता के रक्त तंत्र से रक्त भ्रूण तक पहुॅंचता है। इसी के द्वारा प्रमुख पोषक तत्व आॅंक्सीजन, भोजन तथा पानी भू्रण को प्राप्त होता हैं।
भ्रूण के शरीर के वज्र्य पदार्थ (waste products) भी आॅंवल एवं नाभिनाल द्वारा माता के रक्त तन्त्र में वापस पहुॅंचते हैं जो माता की विसर्जन प्रणाली द्वारा बाहर निकल जाते हैं।
यद्यपि भ्रूण का अपना रक्त संचार तन्त्र (Circulatory system) होता है परन्तु भू्रण पोषण पदार्थ प्राप्त करने एवं वज्र्य पदार्थ को उत्सर्जित करने के लिए आॅंवल पर निर्भर करता है।
माता एवं भ्रूण के रक्त तन्त्रों के बीच सीधा सम्पर्क नहीं नही होता। सम्पर्क आॅंवल के माध्यम से होता है।

(III) गर्भ झिल्ली (Sac):- यह तीसरा प्रमुख सहायक उपकरण है। यह चार झिल्लियों से बना होता है तथा आॅवल से जुड़ा होता है। इसमें एम्नियोटिक द्रव (Amniotic fluid) नामक तरल पदार्थ भरा रहता है। इस द्रव के अन्दर भ्रूण विकसित होता है। इसका कार्य भ्रूण की रक्षा करना तथा जन्म पूर्व के वातावरण के तापमान को स्थिर रखना होता है।
जन्म से पहले गर्भ झिल्ली फट जाती है तथा तरल पदार्थ बाहर निकलने लगता है जो शिशु क बाहर आने के मार्ग को चिकना (Lubricate) करने में सहायक होता है।
जन्म के उपरान्त ये तीनों उपकरण माता के गर्भ से बाहर आ जाते है।?
कोष समुच्चय का आन्तरिक भाग तीन परत वाला होताः-
पिण्डावस्था के अन्त तक भ्रूण मानव का आकार ले लेता है किन्तु उसके विभिन्न अंगों का परस्पर अनुपात प्रौढ़ से काफी भिन्न होता है।

पिण्डावस्था का महत्व:-
(I) कुपोषण, सदमों, अत्यधिक शारीरिक गतिशीलता, ग्रन्थियों के कार्यों में व्यवधान से अथवा अन्य किसी कारण से भ्रूण गर्भाशय की दीवार से विलग हो सकता है एवं स्वतः गर्भपात (Spontaneous Abortion/Miscarriage) हो जाता है।

(II) भ्रूण के शरीर निर्माण में कुछ ऐसी विसंगतियाॅं उत्पन्न हो जाती हैं जो बाद में भी दूर नहीं की जा सकती जिसके परिणामस्वरूप् बालक का विकास प्रभावित होता है।

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