PHYSICAL DEVELOPMENT, शारीरिक विकास को प्रभावित करने वाले कारक

शारीरिक विकास को प्रभावित करने वाले कारक :-

1. वंशानुक्रम (Heredity):- माता-पिता की शारीरिक संरचना, स्वास्थ्य एवं रोग आदि का प्रभाव।
2. वातावरण (Environment):- स्वच्छता, शुद्ध वायु एवं प्रकाश आदि।
3. भोजन (Food):- पौष्टिक भोजन (Nutrient Food)
4. दिनचयों (Routine):- नियमित एवं समय से नहाना, खाना, खेलना, सोना आदि।
5.विश्राम एवं निद्रा:- नवजात शिशु अधिकांश समय सोता है:-
3 से 4 वर्ष का शिशु 12 घंटे सोता है
बाल्यावस्था में 10 घंटे सोता है
किशोरावस्था में 8 घंटे सोता है।

6.प्रेम व सहानुभूति:- माता एवं परिवार का प्रेम एवं स्नेह भी शारीरिक विकास को संतुलित बनाने में सहायक होता है।
7.खेल एवं व्यायाम:- स्वच्छ एवं खुली हवा में खेल एवं व्यायाम आवश्य होता है।
8.दुर्घटना
9.रोग का प्रभाव
10.गर्भावस्था में विकास की परिस्थितियाॅं:- शारीरिक विकास काफी हद तक अन्य विकास को प्रभावित करता है। अतः शिक्षक को चाहिए कि बालक को इसके महत्व का ज्ञान कराए एवं विकास को उपयुक्त दिशा प्रदान करे।
व्यः संधि अवस्था (यौवनारम्भ) (Stage of Puberty):- यह अवस्था वास्तव में बाल्यावस्था और किशोरावस्था को मिलाने वाली अवस्था होती है। इसका कुछ भाग बाल्यावस्था तथा कुछ भाग किशोरावस्था में पड़ता हैं
यौवनारम्भ (वयः सन्धि) वह आयु है जिसमें शारीरिक एवं मानसिक परिवर्तन तीव्र गति से होते है। जिसमें बालोचित दृष्टिकोण एवं व्यवहार पीछे छूट जाते हैं और उनकी जगह परिपक्व शरीर एवं नए प्रकार के व्यवहार ले लेते है। वयः सन्धि अवस्था को कभी-कभी नकारात्मक दशा भी कहा जाता है अर्थात वह सम्पूर्ण जीवन की लघु आयु है जिसमें बालक जीवन के प्रति प्रतिकूल अभिवृत्ति अपना लेता है। नकारात्मक दशा का सबसे बुरा प्रभाव लड़कियों के ऊपर प्रथम रजस्राव (Menstruation) के बाद पड़ता है
लड़कियों में यौवनारम्भ (Puberty) की मुख्य पहचान प्रथम रजस्राव होता है किन्तु लड़कों में इसके प्रारम्भ के निश्चित एवं स्पष्ट लक्षण नहीं होते। लड़कों में यौवनारम्भ की लोकप्रिय कसौटी स्वप्न दोष माना जाता है।
लड़के एवं लड़कियाॅं 50 साल पूर्व की अपेक्षा अब जल्दी तरूण हो रहे हैं।
उष्णकटिबंध के बालकों की अपेक्षा शीतोष्ण कटिबंध के बालक एवं देतहाती बालकों की अपेक्षा शहरी बालकों में लैंगिक परिपक्वता शीघ्र आती है। लड़कियों को अधिक प्रोटीन युक्त भोजन देने से वे शीघ्र परिपक्व हो जाती हैं जअकि अधिक कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन देने से वे देर से परिपक्त होती है।

लड़कों की अपेक्षा लड़कियाॅं सामान्यतः यौवनारम्भ से अधिक गंभीर रूप से प्रभावित होती है।

यौनारम्भ (Puberty) अवस्था की विशेषताएॅं:-

1.एकांत प्रियता की प्रवृत्ति (Lonliness Tendency)
2.कार्य में अरूचि (Monatony in work)
3.सामंजस्य की कमी (Lack of Adjustment)
4.सामाजिक विरोध की भावना (Against Society)
5.ऊब की प्रवृत्ति (Bordum Feeling)
6.बेचैनी (Uneasiness)
7.अनुशासन व शासन का विरोध (Against Disoipline and Administration)
8.संवेगात्मक व्यवहार में वृद्धि (Growth of Emotional Behaviour)
9.आत्म विश्वास की कमी (Lack of Self Confidence)

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