शारीरिक विकास (PHYSICAL DEVELOPMENT)(iii) बाल्यावस्था में शारीरिक विकास (PHYSICAL DEVELOPMENT IN CHILDHOOD)

(iii) बाल्यावस्था में शारीरिक विकास (PHYSICAL DEVELOPMENT IN CHILDHOOD)

6 वर्ष से 12 वर्ष तक बाल्यावस्था माना जाता है 9-12 वर्ष तक शारीरिक विकास दृढ़ता की ओर उन्मुख हेाता है। यही कारणा है कि 9 से 12 वर्ष के काल को परिपाक काल (Consolidation Period) कहा जाता है।

1.लम्बाई (सेमी0 में):- बाल्यावस्था में लम्बाई 5-7 से0 मी0 प्रतिवर्ष की दर से बढ़ती है।

2 वर्ष              6 वर्ष              10 वर्ष            12 वर्ष
बालक      81.6               108.5            128.4             138.3
बालिका     80.1              107.4            128.4             139.2

2. भार (कि0 ग्राम में):- 9-10 वर्ष तक बालक का भर बालिका से अधिक होता है किन्तु बाद में बालिका का भार बढ़ता है।

2 वर्ष                  6 वर्ष                   10 वर्ष           12 वर्ष
बालक          10.1                  16.3                    23.5              28.5
बालिका        9.6                    16.0                    23.6              29.8

3. सिर तथा मस्तिष्क (Head & Brain):- सिर के अनुपात में कमी आती है। मस्तिष्क का भार एवं आकार वयस्क व्यक्ति के भार एवं आकार का 95 प्रतिशत होता है।

4. हड्डियाॅं (Bones):- इस अवस्था में हड्डियों का दृढ़ीकरण अथवा अस्थिकरण ( Ossification ) तेजी से होता है। इस अवस्था में हड्डियों में लचीलापन समाप्त होने लगता है व उनमें कड़ापन आने लगता है।
हड्डियों की संख्या बढ़कर 270 से 350 के लगभग हो जाती है। हड्डियों की संख्या में परवर्तन होता है। कुछ झिल्लियाॅं हड्डियों का रूप धारण कर लेती है। जबकि कुछ कोमल हड्डियाॅं जुड़कर एक हो जाती हैं।

5.दाॅंत (Teeth):- 5-6 वर्ष से स्थायी दाॅंत निकलने लगते हैं। 12 वर्ष की आयु तक लगभग 27-28 स्थायी दाॅंत निकल आते हैं तथा शेष चार प्रज्ञ दंत/अक्ल दाढ़े (Wisdom Teeth) किशोरावस्था के अन्त अथवा प्रौढ़ावस्था के प्रारम्भ में आ जाते हैं। दाॅंतों के कारण मुख का भेलापन समाप्त होने लगता है।

6.मांसपेशियाॅं ( Muscles ):- बाल्यावस्था के अन्त तक मांसपेशियाॅं समस्त शरीर के भार का 33 प्रतिशत हो जाती हैं।

7.अन्य अंग (Other Organs):- इस अवस्था में लगभग सभी अंगों का विकास हो जाता है जिसके कारण बालक अपने विभिन्न शारीरिक अंगों, शक्तियों तथा गति पर नियंत्रण रखने में समर्थ हो जाता है। बालक के कंधे चैड़े कूल्हे पतले तथा पैर सीधे एवं लम्बे होते हैं। बालिका के कंधे पतले, कूल्हे चैड़े एवं पैर कुद अन्दर को झुके होते हैं।
11-12 वर्ष की आयु में बालक-बालिका के यौन अंगों का विकास होने लगता हैं।
हृदय की धड़कन घटकर प्रति मिनट 85 तक हो जाती है।

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