Constitution – भारत शासन अधिनियम, 1858 (government of india Act, 1858)

इस महत्वपूर्ण कानून का निर्माण 1857 के विद्रोह क बाद किया गया जिसे भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम या सिपाही विद्रोह भी कहा जाता है। भारत के शासन को अच्छा बनाने वाला अधिनियम नाम के प्रसिद्ध इस कानून ने, ईस्ट इंडिया कंपनी को समाप्त कर दिया और गवर्नरों, क्षेत्रों और राजस्व संबंधी शक्तियों ब्रिटिश राजशाही […]

Constitution-चार्टर अधिनियम, 1853 (Charter Act, 1853)

1793 से 1853 के दौरान ब्रिटिश संसद द्वारा पारित किए गए चार्टर अधिनियमों की श्रृंखला में यह अंतिम अधिनियम था। 1.      इसने पहली बार गवर्नर जनरल की परिषद के विधायी एवं प्रशासनिक कार्यों को अलग कर दिया इसके तहत परिषद में छह नए पार्षद और जोड़े गए इनहें विधान पार्षद कहा गया दूसरे शब्दों में […]

Constitution- चार्टर अधिनियम 1833 (Charter Act, 1833)

ब्रिटिश भारत के केंद्रीयकरण की दिशा में यह अधिनियम निर्णायक कदम था। इस अधिनियम की विशेषताऐं निम्नानुसार थी- 1.   कंपनी के व्यापारिक अधिकार पूर्णतः समाप्त कर दिये गए। 2.   अब कंपनी का कार्य ब्रिटिश सरकार की ओर से केवल भारत पर शासन करना रह गया। 3.   अभी तक गवर्नर जनरल की कार्यकारिणी में तीन सदस्य […]

चार्टर अधिनियम, 1813 (Charter Act , 1813)

1. इस एक्ट के द्वारा कंपनी के अधिकार पत्र को 20 वर्षों के लिये बढ़ा दिया गया व कंपनी के भारत के साथ व्यापार करने के एकाधिकार को समाप्त कर दिया गया। 2. लेकिन कंपनी का चीन के साथ व्यापार और चाय के व्यापार पर यह एकाधिकार बरकरार रखा गया। 3. कुछ सीमाओं के तहत […]

पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 (Pitts india Act 1784)

1. इस एक्ट को ब्रिटिष संसद में तत्कालीन प्रधानमंत्री विलियम पिट द्वारा प्रस्तुत किया गया था। 2. इसने कंपनी के राजनैतिक और वाणिज्यिक कार्यो को पृथक-पृथक कर दिया। 3. इसने निदेषक मंडल को कंपनी के व्यापारिक मामलों के अधीक्षण की अनुमति तो दे दी लेकिन राजनैतिक मामलों के प्रबंधन के लिए नियंत्रण बोर्ड (बोर्ड आॅफ […]

एक्ट आॅफ सेटलमेंट, 1781 (Act of settlement ,1781)

1.  इस अधिनियम का प्रमुख प्रावधान गवर्नर जनरल की परिशद तथा सर्वोच्च न्यायालय के बीच के संबंधों का सीमांकन करना था। 2.  इस अधिनियम द्वारा सर्वोच्च न्यायालय पर यह रोक लगा दी गई कि वह कंपनी के कर्मचारियों के विरूद्ध कार्रवाई नहीं कर सकता है, जो उन्होनें एक सरकारी अधिकारी की हैसियत से की हो। […]

CONSTITUTION-संवैधानिक विकास के चरण (STAGES OF CONSTITUTIONAL DEVELOPMENT)

संविधान और राजव्यवस्था के अनेक उपादान ब्रिटिष षासन से ग्रहण किए गए हैं, ब्रिटिषों द्वारा समय-समय पर लाए गए अधिनियमों ने भारतीय सरकार और प्रषासन की विधिक रूपरेखा को तैयार किया है। 1. रेग्युलेटिंग एक्ट, 1773 (Regulating Act , 1773) भारतीय संवैधानिक इतिहास में इसका विशेष महत्व यह है कि इसके द्वारा भारत में कंपनी […]

CG SPACIAL-भू-वैज्ञानिक संरचना

पृथ्वी के भु- विज्ञानिक इतिहास के प्रारम्भिक काल से ही भारत का पठारी भाग रहा है केवल कुल तक आंषिक रूप से यह छिछले समुद्र में ढक गया था जिसे टेथिल सागर पुकार गया इस काल के निक्षेपण जलज चटट्नो (अवसदी) के रूप में मिलते है। भु- भाग पर आंतरभौमिक क्रियाओं का भी अधिक प्रभाव […]

CG SPECIAL जशपुर-सामरीपाट प्रदेष

स्थिति-यह छत्तीसगढ़ प्रदेश के उत्तर पूर्वी सीमान्त हिस्से में सरगुजा बेसिन के पश्चिम एवं दक्षिण पश्चिम में अवस्थित है यह पूर्वी सरगुजा जिले के दक्षिणी अम्बिकापुर, सीतापुर, लुंड्रा तथा सामरी जशपुर जिले के बगीचा, जशपुर कुनकुरी एवं पत्थलगांव तहसीलों तक विस्तृत है। भौतिक संरचना- यह एक पाट क्षेत्र है वस्तुतः पाट एक उच्च समतलीय व […]

CG SPECIAL छत्तीसगढ़ के भौतिक एंव प्राकृतिक विभाग

छत्तीसगढ़ वस्तुतः देष के वृहद प्रायद्विपीय पठार के उत्तरी – पुर्वी भाग मे विस्तृत है, जिसमे बघेलखण्ड के पठार का दक्षिण – पुर्वी हिस्सा, पाट प्रवेष,सम्पुर्ण छत्तीसगढ़ का मैदान दण्डकारण्य का पठार सम्मिलित है। धरातलीय संरचना की दृश्टि से इस प्रदेष में जहाँ एक ओर ऊँची पर्वतमालाएं और पठार है वही दुसरी ओर इनमे निकलने […]